Thursday, 13 February 2020

राईका/रबारी/देवासी समाज का पूरा इतिहास और गोत्र ?


राईका/रबारी/देवासी समाज का पूरा इतिहास और गोत्र ?  



दोस्तों में गौतम राईका में आज इस आर्टिकल के माध्यम से आपको बताऊंगा की राईका/रबारी/देवासी  समाज का इतिहास दोस्तों यह एक चरवाह जाती है जो राईका, देवासी, देसाई,रबारी, गडरिया, गाडरी,गोपालक, मलधारी,पाल,हिरावंसी, निम्न नामों से जानी जाती है, यह जाती चरवाह होने के नाते हमेशा ही प्रकृति के निकट रही है इसलिय इस जाती के लोग सदा ही सरल प्रेमालूऔर दयावान रहे है, 
इन्ही देव्गुनो की बदोलत पोराणिक लोग इनमे देवताओ का वास  मानते थे इसलिए इन्हें देव वासी का संबोधन प्राप्त हुआ जो आगे चल कर देव वासी हो गया, दूसरा शब्द है रेबारी जिसका मूल शब्द हे रेवाड़ी अर्थार्त यह शब्द उतरा है रेवड़ से जिसका अर्थ है ढोर या पशुओ क झुण्ड और उन ढोरो के पलक को रेवाड़ी खा जाने लगा जो बाद में रेबारी हो गया,


कुछ विद्वानों का मनना हे की शुरूआती आर्यों लगभग एक ही जाती के थे जिनका मुख्य काम था पशुपालन और खेती बाड़ी, धीरे धीरे उनमे से कई जातियो का उद्भव हुआ सभ्य मनुष्यों का व्यवसाय था पशुपालन और खेती बाड़ी अथार्त इन जातियों ने पीढ़ी दर पीढ़ी पशुपालन के व्यवसाय को अपनाया रखा वो जाती सबसे पोराणिक जाती के जिन्दा रखा रखा है,  देवासी अर्थार्त रबारी जाती न बल्कि राजस्थान लेकिन पुरे भारत में फैली हुई है विशेष कर उत्तर पश्चिम भारत और मध्ये भारत में यह जाती राजस्थान के अतिरिक्त गुजरात, मध्येप्रदेश, उतरप्रदेश, हरियाणा, पंजाब, में भी निवास करती है एक अनुमान के मुताबिक पाकिस्तान में भी लगभग 10000 रेबारी आज भी निवास करते है, यह जाती शुरू से ही पशुपालन से जुडी होने के नाते घुम्मकड़ जीवन निर्वाह करती रही शायद ये ही कारन हे की इनका कोई लिखित पर्मानिक इतिहास नहीं है , किन्तु दन्त कथाओं कुछ भाट-वाहियों की माने तो इस जाती का इतिहास सामने आया है,

देवासी जाती की उत्पति 

राईका/रबारी/देवासी समाज का पूरा इतिहास और गोत्र ?
शिव 

माना जाता है की इस जाती की उत्पति कुछ इस प्रकार हुई की एक बार माता पार्वती ने सरोवर की गीली मिटटी से एक ऊंट की आकृति बनायीं और भोले नाथ शिव से प्रार्थना की की आप इसे संजिवत कर दो तो भगवन शिव ने उस आकृति की संजिवत   दिया और पहली बार ऊंट प्रजाति का जन्म हुआ माँ पार्वती ने अपने प्रिये ऊंट की देखरेख की लिए चरवाह प्रकट करने को कहा तो भोले नाथ ने सामने खड़े शामल नमक पढ़ की छाल से एक मनुष्य प्रकट किया जिसने उस ऊंट अर्थार्त सांड की खूब सेवा की आगे चलाकर उन की पीढियों ने ऊंट को पलना जारी रखा जिसकी बदोलत बदोलत देवासियो में एक गोत्र पाई जाती है इन्हें सामड कहा जाता है ,

राईका/रबारी/देवासी समाज का पूरा इतिहास और गोत्र ?

कहा जाता है की वह व्यक्ति शिव पार्वती का भक्त था इसलिए शिवजी ने उसे ऊँटो का एक झुण्ड देकर भूलोक को विदा किया आगे चलकर उसको चार बेटियां हुई शिवजी ने उनके ब्याह राजपूत जाती के पुरुषो के साथ की और उनकी जो संतति हुई वो हिमालय के नियम के बाहर हुई थी इसलिए वो राह्बरी/ रेबारी के नाम से जाना जाता है भट-चारण और वाही वन्साओ के ग्रंथो के आधार पर मूल पुरुष को सोलह लडकियां हुईं और उन सोलह लड़कियों का ब्याह सोलेह क्षत्रिये पुरुषों के साथ हुआ जो हिमालय के नियम के बाहर था इसलिए उन्हें रहबरी / रेबारी के नाम से जाना जाता है जिनकी शाख राठोड, परमार, सोलंकी, मख्वाणा, आदि राखी गयी  ज्यो ज्यों वंश आगे बढ़ा रबारी जाती अनेक शाखाओं में बाँट गयी वर्तमान में इनकी 133 गोत्र या शाखा उभर क्र सामने आई,
जिसे विशोतर के नाम से भी जाना जाता है अर्थार्त (20+100+13=133), के नाम से पहचानी गयी , लेकिन वि राजपूतो में से रायपुत्र के नाम से व् रायपुत्र का अपभ्रंश होने से रायका के नाम से व् गायो का पालन करने से गोपालक , महाभारत के  के समय में पांड्वो का महत्वपूर्ण काम करने से देसाई के नाम से भी जानी जाती है, एक मान्यता के अनुसार मक्का मदीना के इलको में मोहमद पैगम्बर साहब से पहले जो अराजकता फैली जिसके कारण मूर्ति पूजा का खूब विरोध चला परिणाम सवरूप इस जाती ने अपना धर्म बचाने के लिए अपने देवी-देवताओ को पालकी में लेकर हिमालय के रस्ते से भारत में प्रवेश किया, इसलिए अभी भी कई राबरी जाती के लोग अपने देवी-देवताओ की की मूर्ति स्थापित नही करते हे,वह उन्हें पालकी में ही पूजा करते है,
इस जाती में शिक्षा में आभाव बहत्त कम था लेकिन अब धीरे धीरे विकास की राह पर अग्रसर हे, इस जाती के के लोग अब शिक्षा में अग्रसित होने के साथ साथ राजनीती की बात करे तो करे तो ये जाती भाग्येशाली है ,

अब अंत में देवासी समाज से मेरी(गौतम राईका) गुजारिश है की आप भले ही विकास के लम्बे डग भरे भले ही आप भविष्य के सिरमोर बने लेकिन आप अपना मूल स्वभाव अपने मूल गुण संस्कृति और जिन्दा दिल जीवन शेल से दूर न होना वर्ना दवासी कोम तो रहेगी परन्तु देव वाषिक हो जायेंगे ,
राईका/रबारी/देवासी समाज का पूरा इतिहास और गोत्र ?

देवासी जाती की प्रमुख गोत्र :-

        1 आल  2 आग 3 आमला 4 आजाणा 5 ऐन्द्दु, आँडू,ऐन्दा, 6 उमोट 7 उलवा 8 बारड 9 बार 10 बालस

11 बोसतर 12 बुरसला 13 बागड़ 14 भरू 15 भरडोम 16 भाड़का 17 भीम 18 भराई 19 भूकिया 20 भुन्गरू

21 भुम्भलिया 22 भुकु २३ भांगरा 24 चावड़ा 25 चन्दुआ 26 चेलाणा 27 चोहान 28 चोपड़ा 29 दत 30 देऊ

 31 डेडिया 32 डेडर डोडर ३३ दगल 34 ढालोप 35 धान्दुआ 36 धारुआ 37 धंगु 38 गांगल 39 गोहित 40 घाटिया

 41 घेघवा 42 गलसर 43 गहलोत ४४ गह्ल्तर 45 गुजर 46 गेहड  47 हेरबी 48 हरावल 49 हुण 50 हुलीच

 51 हरण 52 जोटाणा 53 जाधव 54 झुआँ 55 झांगर 56 जंज (झंद्द) 57 जाडेजा 58 जोधा 59 झाला 60 जाहेर

61 जाम्बड 62 करमता 63 करगता 64 खरड 65कासेला 66कालर 67 लोतरा 68 खाम्बला 69 कटारिया 70 खेर

71 कोदियातर 72 कोला 73 करोड़ 74 खेखा 75 कुंकड 76 कच्छवाह 77 कलवा 78 कासद 79 खटाणा 80 लव्तुंग

81 लोडा 82 लूणी 83 लुल्तारा 84 मकवाणा 85 मोटन 86 मोरदाव 87 मरिया 88 मेह 89 मरोड़ 90 नांगु

91 नार 92 परमार 93 परिहार 94 पेवाला 95 पनकारा 96 पुन्शला 97 पारिवाल, पाल 98 पराट 99 पवेसा 100 फलदुंडा

101 पन्ना 102 रोज 103 राठोड 104 राडा 105 रागुआ 106 रागिया 107 रोंटी 108 सेप्डा 109 साम्बड 110 सव्धरिया, सबदरा

111 शेखा 112 सिंगल 113 सरधना 114 सावलाना 115 सुकल 116 सिसोदिया 117 सोढा 118 तलतोड़ 119 तवोना 120 वेराना

121 विरोड 122 वीसा 123 वनुआ 124 वाघेला 125 वतमा 126 रंजा 127 धुला 128 मोट 129 धम्बड 130 दहिया

131 सेवाल 132 तमालिया 133  मोरी, डाभी, मोड्या, सव्तानी, पिसवाला, अलावत, रामपा, सेंगावत, भासवत, लुन्का

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दोस्तों कोई लेखन में कही इधर उधर हो तो क्षमा करे वैसे लिखने में बहुत सावधानी बरती फिर भी कही गलती हो तो क्षमा करे
नीचे कमेन्ट करे आप कहा से हो और आपकी गोत्र क्या है .----------------------------------------

धन्येवाद देवासी/रेबारी भाईओं फोलो करना न भूले

Tuesday, 11 February 2020

पुष्कर (तीर्थ-राज) आप भी जाना चाहते है जाने यहाँ की खासियत क्यों प्रसिद्ध है ये स्थान जानें?

पुष्कर (तीर्थ-राज) आप भी जाना चाहते है जाने यहाँ की खासियत क्यों प्रसिद्ध है ये स्थान जानें?

पुष्कर (तीर्थ-राज) आप भी जाना चाहते है जाने यहाँ की खासियत क्यों प्रसिद्ध है ये स्थान जानें?
pushkar

दोस्तों पुष्कर शहर के बारे में तो आप जानते ही हो क्योंकी ये शहर अपने मंदिरों के लिए फेमस है

पुष्कर का इतिहास

दोस्तों पुष्कर भारत के प्राचीन शहरों में एक है, पुष्कर का संस्कृत भाषा में अर्थ है कमल का फूल, पुष्कर राजस्थान राज्ये के अजमेर जिले मैं स्थित अरावली पर्वत माला के बिच स्थित है
पुष्कर मै कई मंदिर है लेकीन सबसे लोकप्रिय प्रसिद्ध मंदिर ब्रम्हा मंदिर है ,जो दुनिया में एक है और पुष्कर को झील के लिए भी प्रसिद्ध माना जाता है
कहा जाता है ब्रम्हा ने यहाँ आकर यज्ञे किया था हिन्दुओ के प्रमुख तीर्थ स्थानों में से एक ही ब्रम्हा मंदिर है जो पुष्कर में स्थित है
यहा वराह और शिव के आत्मेश्वर मंदिर भी है लेकिन ऐसा  कहा जाता है की यहाँ के प्राचीन मंदिरों को मुग़ल सम्राट ओरंगजेब ने नष्ट भ्रष्ट कर दिया था पुष्कर झील पर बने 52 घाट धनि-मनी व्यक्तियों द्वारा बनाया गया था
पुष्कर का उलेख रामायण में भी किया गया है
और इस शहर की एक और खासियत है केमल फेयर यानि ऊँटो का मैला जिसे देखने विदेशी पर्यटन भी आते है
और यहाँ और भी कही उच्च लेवल के पशुओ की बोली लगती है जिनकी रेट करोडो मै होती है क्या है आखिर यहाँ की खासियत
आज हम लोग जानेगे की पुष्कर में और कोनसी जगह फेमस हे, कब लगता है पुष्कर फेयर , कैसे घुमे पुष्कर में ,
दोस्तों पुष्कर को तीर्थ नगरी के नाम से भी जाना जाता है यहाँ ऐसा माना जाता है की यहाँ 52 घाट पवित्र जल में डुबकी(स्नान) लगाने और ब्रम्हा मंदिर के दर्शन करने के बाद आपके
साहरे पाप मिट जाते है यहाँ राजस्थान के लोग कार्तिक में ब्रम्हा मंदिर के दर्शन वे 52 घाट पर नहाकर अपने को पवित्र करते है इनके अलावा कही राज्ये के लोग यहाँ आने
का अपना सोभाग्ये समजते है पुष्कर का दरसन हर कोई इन्सान करने का प्लान बनाते है यहाँ भारत के लोग ही नही बल्कि विदेशी पर्यटन भी अधिक संख्या में आते है हर साल
पुष्कर का मैला विश्व में फैमस मेला है , ब्रम्हा मंदिर पुरे विश्व में एक ही ऐसा मंदिर है जहाँ हर साल श्रदालुओ की भीड़ लगती है
तो जानते है यंहा की प्रसिद जगह जिनका आप भी यहाँ आकर ब्रम्हा मंदिर के दर्शन कर सकते है

 पुष्कर मैला 

पुष्कर (तीर्थ-राज) आप भी जाना चाहते है जाने यहाँ की खासियत क्यों प्रसिद्ध है ये स्थान जानें?
camel fair pushkar

अजमेर से 12 km की दुरी पर स्थित तीर्थ स्थल पुष्कर है, यहाँ कार्तिक की पूर्णिमा को मैला लगता है जिसमे बड़ी संख्या म विदेशी पर्यटन भी आते है
यहाँ की व्यवस्था स्थानीय प्रशासन करते है और यहाँ पर कला संस्कृति का आयोजन किया जाता है
और इस समय यहाँ पर पशु  मैले का भी आयोजन किया जाता है और पशुओ से साम्बंधित विभिन कार्येक्रम भी किये जाते है यहाँ श्रेष्ठ पशु नसल को पुरिश्क्रित भी किया जाता है
यहाँ का डेजर्ट भी स्र्हनिये है यहाँ हर साल लगने अले ऊंट मेले ने तो दुनिया मै एक अलग ही पहचान दे दी मैला रेत के अलग स्थान मैं लगाया जाता है और यहाँ पर राजस्थान व् आस पास के आदिवासी व् ग्रामीण के लोग अपने पशुओ के साथ यहाँ आते है यहाँ कई दुकाने भी लगती है जैसे खाने पाने की सरकस, झूले, और भी और भी बहुत कुछ यह मैला पशु मैले में एक अलग ही पहचान बना रहा है इस मैले ऊँटो के के कई बड़े बड़े झुण्ड नजर आते है जिनकी बोलिया लगती है व् यहाँ ऊँटो की खरीददारी भी कई अधिक मात्र म होती है ये (अक्टूबर-नवम्बर) में स्थापित किया जाता है हर साल  

पुष्कर मैं लगभग 500 मंदिर स्थित है जहा हर साल हारी मात्र मैं भक्तों का दौरा किया जाता है

ब्रम्हा मंदिर के बारे मैं जानकारी

पुष्कर मैं 500 से अधिक मंदिर है लेकिन इनमे से सबसे लोकप्रिय मंदिर है ब्रम्हा मंदिर, ब्रम्हा मंदिर को जगत पिता भी कहा जाता है ये मंदिर संगमरमर से बना हुआ है जो बहुत ही सरहनिये है इस मंदिर मैं ब्रम्हा व् उनकी पत्नी गायत्री की मूर्ति है, मंदिर के प्रवेश द्वार पर एक हंस है जो पवित्र झील के साथ भक्त मंदिर मैं उनकी यात्रा को जोड़ता है
यह मंदिर गर्मियों के दौरान पुरे दिन सुबह 5 बजे से 1.30 बजे और शाम 3 से 9 बजे तक खुला रहता ही सर्दियों में 6 से 8:30 बजे तक खुला रहता है

पुष्कर की और प्रसिद्ध जगह



ब्रम्हा मंदिर
पुष्कर झील
वराह मंदिर
पुष्कर पशु मैला
रंगजी मंदिर
सिंह सभा गुरुद्वारा
दिगंबर जैन मंदिर
मीरा मंदिर मेड़ता सिटी
सावित्री मंदिर
स्पॉट पाप मोचनी मंदिर
नाग पहाड़
आत्मेश्वर मंदिर
रोज गार्डन
मन महल
पुष्कर बाज़ार

 

पुष्कर का प्रसिद्ध भोजन

यहाँ की भोजन सामग्री पर्यटनो को बहुत पसंद आती है ,
यहाँ हर प्रकार की भोजन मेनू उपलब्ध है लेकिन यहाँ का स्थानीय भोजन जो पुष्कर को और सराहनिए बनता है
ये बहुत ही कम कीमत मैं आपको मिल जायेगा, यहाँ के स्थानीय फ़ूड में मालपुआ, पोहा, दल बाटी, चूरमा,कड़ी कचोरी और लस्सी जैसे भोज्ये पदार्थ उपलब्ध है

पुष्कर कैसे पहुंचे  


अगर आपने पुष्कर जाने का प्लान बना ही लिया है तो आप यहाँ पहुचने के लिए रेल,बस या हवाई जहाज को भी चुन सकते है

रेल व् बस से कैसे पहुंचे

रेल व् बस से पहंचने के लिए अजमेर से ये साधन उपलब्ध है जो पुष्कर से लगभग 12 km की दुरी पर स्थित है

हवाई जहाज से कैसे पहुंचे

दोस्तों हवाई जहाज से पहुचने के लिए आपको 150 km की यात्रा बस या रेल से यात्रा करनी पड़ेगी
हवाई अड्डा सांगानेर जयपुर में स्थित है जो पुष्कर से 150 km की दुरी पर स्थित है
पधारो म्हारे देश आप भी बनाये राजस्थान घूमने का प्लान ये जगह है फेमश desert  राजस्थान में गुमने का सबसेअच्छा अक्टूबर से मार्च होता है .इसके अला यहाँ के किलेकठपुतली डांस, घुमर, महल, यहाँ का लाजवाब खान पान, दोस्तों राजस्थान शूरवीरों कीधर्ती मानी जाती है ये ट्रिप आपका यादगार ट्रिपहोगा तो क्यूपधारो म्हारे देश आप भी बनाये राजस्थान घूमने का प्लान ये जगह है फेमश desert  राजस्थान में गुमने का सबसेअच्छा अक्टूबर से मार्च होता है .इसके अला यहाँ के किलेकठपुतली डांस, घुमर, महल, यहाँ का लाजवाब खान पान, दोस्तों राजस्थान शूरवीरों कीधर्ती मानी जाती है ये ट्रिप आपका यादगार ट्रिपहोगा तो क्यू ना इस बार राजस्थान घुमने का प्लान बनाये राजस्थान के शाही ठाट-बाटका आनंद लेना चाहते हो तो अभी हि बनाए राजस्थान 
भारत की यह 5 जगह कोई जन्नत से कम नहीं लेकिन कोई नहीं जनता इनके बारे मै







Monday, 10 February 2020

भारत की यह 5 जगह कोई जन्नत से कम नहीं लेकिन कोई नहीं जनता इनके बारे मै


भारत की यह 5 जगह कोई जन्नत से कम नहीं लेकिन कोई नहीं जनता इनके बारे मै



भारत की यह 5 जगह कोई जन्नत से कम नहीं लेकिन कोई नहीं जनता इनके बारे मै

दोस्तों आज हम लोग ऐसे पर्यटन स्थल ज्न्नेंगे जिसका हर आदमी का सपना होता है वहा जाने का वो भी भारत मै ,
भारत विविधता से भरा एक ऐसा देश है, जहाँ घमने के लिए दुनियाभर से पर्यटन आते है और भारत मै कई ऐसी जगह है जिनके खूबसूरती के हर कोई लोग दीवाने हो जाते है
उनके लिए ये जगह कोई जैकपोट से कम नहीं ,तो आइये जानते है की वो कोंनसी जगह है जिसके आप भी दिवाने है
  

रत्नागिरी (MAHARASTRA)

              रत्नागिरी महारास्ट्र राज्य में रत्नागिरी जिले में स्थित एक नगर है , ये अरब सागर के तट पर स्थित है ये क्षेत्र पश्चिम में सह्याद्री पर्वतमाला से घिरा हुआ है
रत्नागिरी मुंबई से लगभग 220 km की दुरी में स्थित हे यहाँ के पर्मुख स्थल
रत्नागिरी दुर्ग , जयगढ़ किला, बौध मठ,थीवा महल, मालगुन्ढ़, गणपति पुल

दोलत बाघ का किला औरंगाबाद

   औरंगाबाद सबसे ज्यादा देखे जाने वाले पर्येटन में शामिल है इस किले का निर्माण बिलरामजा ने किया था ,इसके अलावा और भी और भी पर्यटन स्थल है औरंगाबाद में
बानी बेगम बाघ , घ्रश्नेश्वरमंदिर , खुल्दाबाद, पिताल्खोरा की गुफाये Etc.

खिमसर ड्यून गांव राजस्थान

खिम्सर एक छोटा सा पुरवा है जो राजस्थान स्थित थार मरुस्थल के किनारे पर है। इस गाँव के बिलकुल बीचों बीच एक पानी की झील है जो इस सूखे मरुस्थल को एक सुरम्य नखलिस्तान में बदलती है। कई वर्षों पहले खिमसर एक स्वतंत्र राज्य था जिसके शासक ठाकुर राजवंश के लोग थे। यहाँ आने वाले पर्यटक आज भी उस दौर में हुए युद्धों के अवशेष इस किले की दीवारों पर देख सकते हैं।

अनंतपुर झील मंदिर केरल

आपको जानकार आश्चर्य होगा कि इस मंदिर की रखवाली एक ऐसा मगरमच्छ करता है जो कभी मांस का सेवन नहीं करता, जी हां ये मगरमच्छ पूर्ण रूप से शाकाहारी है। ये अद्भुत और बेहद खूबसूरत मंदिर केरल स्थित कासरगोड जिले के अनंतपुर गांव में मौजूद है। यहाँ विदेशी पर्यटन भी आते है तो एक बार आप भी जरुर जाये यहा

 

भीमबेटका मध्येप्रदेश

मध्य प्रदेश की प्रसिद्ध भीमबेटका की गुफाएं भोपाल से 46 किलोमीटर दक्षिण में स्थित हैं. यह प्रागैतिहासिक कला का प्रहरी होने के साथ ही भारतीय स्थापत्य कला का अनुपम खजाना.          है यह भी एक अनोखी जगह है आपके देखने लायक तो दोस्तों यहाँ का ट्रिप भी जरुर करे आप


 दोस्तों कैसी लगी आज की पोस्ट आपको अगर अची लगी हो तो मुझे कमेंट जरुर करे  और फोलो करे ऐसी उपडेट पाने के लिए
धन्यवाद

पधारो म्हारे देश आप भी बनाये राजस्थान घूमने का प्लान ये जगह है फेमश


पधारो म्हारे देश आप भी बनाये राजस्थान घूमने का प्लान ये जगह है फेमश 

पधारो म्हारे देश आप भी बनाये राजस्थान घूमने का प्लान ये जगह है फेमश
desert 

राजस्थान में गुमने का सबसे अच्छा अक्टूबर से मार्च होता है .
इसके अला यहाँ के किले कठपुतली डांस, घुमर, महल, यहाँ का लाजवाब खान पान, दोस्तों राजस्थान शूरवीरों की धर्ती मानी जाती है
ये ट्रिप आपका यादगार ट्रिप होगा तो क्यू ना इस बार राजस्थान घुमने का प्लान बनाये
राजस्थान के शाही ठाट-बाट का आनंद लेना चाहते हो तो अभी हि बनाए राजस्थान क ट्रिप राजस्थान बहुत अची जगह है यहाँ वेदेशी पर्यटन भी
घुमने का शोक रखते है तो क्यू नहीं आप भी यहाँ का पर्यटन प्लान बनाये
कोन-कोनसी जगह है राजस्थान मैं घुमने लाइक आइये जानते है

राजस्थान का डेजर्ट मैं नाईट कैपिंग –

                           राजस्थान मैं किले की कोई कमी नहीं है जिनमे से अब कई महलों को बदल कर हेरिटेज होटल मै बदल दिया गया है जहा रुककर आप शाही ठाट-बाट से आनंद ले सकते हो राजस्थान मैं जयपुर के अलावा उदयपुर जोधपुर मैं भी कई हेरिटेज होटल का आप्शन मीलता है
राजस्थान के जैसलमेर जाकर आप वहा का नाईट का नजरा दिन का नजारा जो अद्भुत है इसके अलावा कैमल राइडिंग ,और होटल और रेस्तोरांत के बजे यहाँ के कैम्पस मैं ठहरने का आनंद जरुर ले और या के मंदीर जो बहुती प्रस्न्लीत है वहाँ पर भी आप लोग घुमने का आनंद ले

जयपुर (पिंक सिटी)

            जयपुर भारत के पुँराने शहरों में से एक है जिसे पिंक सिटी के नाम से भी जाना जाता है राजस्थान राज्ये की राजधानी कहा जाने वाला शहर को अम्बेर के रजा महाराजा सवाई जय सिंह ने बसाया था ये भारत का पहला शहर है जिसे वास्तुशाश्त्र के अनुसार बसाया गया था
hawa mahal jaipur rajasthan
हवा महल 

जयपुर के 1२ पैलेस जिसको देखने और यहाँ घुमने का एक सपना रखते है लोग वो ये है:-

1 अम्बेर किला
2 सिटी पैलेस
3 नाहरगढ़ किला
4 हवा महल
5 जलमहल
6 जैगढ़ किला
7 जंतर मंतर वेधशाला  
8 अल्बर्ट हॉल संग्रहालय(museum)
9 पिंक सिटी बाज़ार
10 गल्ताजी
11 गोविन्द देव जी का मंदिर
12 बिरला मंदिर

पुष्कर:-

        
पधारो म्हारे देश आप भी बनाये राजस्थान घूमने का प्लान ये जगह है फेमश
pushkar 



पुष्कर राजस्थान के अजमेर जिले में स्थित है यह अजमेर के उत्तर-पश्चिम में स्थित है यह अजमेर से 15 किलोमीटर की दुरी में स्थति है  
पुष्कर थर रेगिस्तान के किनारे स्थित एक शहर है जो राजस्थान के पूर्वोतर भारतीय राज्य में है
यह पुष्कर झील पर स्थित है यह एक पवित्र हिन्दू स्थल है, जहा 52 घाटों के साथ तीर्थ यात्रिओं के स्नान भी करना पुण्ये का काम है
इस सहर में 14 शताब्दी के जगत्पिता ब्रह्मा मंदिर के अलावा सेंकडो मंदिर स्थित है

राजस्थान का बुलेट बाबा मंदिर:-

ओम बन्ना 


                      जोधपुर के नजदीक पाली शहर से 20 km की दुरी पर स्थित बुलेट बाबा का मंदिर गाँव चोटिला  एक अनोखी जगह है जहा 350cc रॉयल इनफिल्ड की पूजा होती है. ये मंदिर ॐ बना को समर्पित है जिनकी सड़क दुर्ग्तना मै मोंत हो गयी थी ये जगह वाकई में देखने लायक है . तो आप राजस्थान का टूर बनाये तो चोटिला जाना न भूले...

इसके अलावा


उदयपुर :-

       उदयपुर की स्थापना 1553 में महाराणा उदय सिंह ने की थी यहाँ ज्यादातर महलों को अब हेरिटेज होटलों में परिवर्ती कर दिया गया है
यहाँ के पर्येतक स्थल
उदयपुर 

*city palace

*lake palace

*Lake pichola  

*Lake Garden Palace

*The royal vintage car museum

*Shilpgram

*Moti Magri

*jagdish tample

*shliyon ki bari

*bagore ki haveli



यहाँ के आलावा और भी है जैसे

>जोधपुर

>जैसलमेर

>बीकानेर

>सवाई माधोपुर

>चितोडगढ़

>माउंट आबू

>अजमेर

  
नोट :- दोस्तों कैसी लगी आज की जानकारी अगर अछि लगी तो शेयर करे और फोलोव जरूर करे 
                   धन्यवाद 


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दुबलेपन से पायें छुटकारा रोजाना डाइट से ? weight gain diet chart   क्या आप भी दुबले पन से परेशान है , दुबलेपन के कारण अपनी style को फोलो...